खुदा की इब्बादत....

अपनी मोहब्बत पर इतना इल्म न कर.
खाक-ए-बदन पे इतना फक्र न कर..  
इश्क तो खुदा की इब्बादत है यारा.
इसे ठुकरा कर उसकी तौहीन न कर..



इल्म = ज्ञान, जानकारी
फक्र = गर्व
तौहीन = बेइज़्ज़ती, अपमान

© Shekhar Kumawat

खुदा से मोहब्बत होगी..


रहेगी सारी बंदिशे रूह और जिस्म के साथ.
 
कफ़न के साथ तो सिर्फ खुदा से मोहब्बत होगी..

© शेखर कुमावत

याद तो आएगी तुझे......


याद तो आएगी तुझे, हमने मोहब्बत जो की है |
पलको पे बिठा कर तेरी इब्बादत जो की हैं ||  

ओह यारा, अब हमसे इतनी नफ़रत तो ना कर |
तेरी जुदाई में तड़फ के ये ज़ह्मत जो की है ||

ज़ह्मत= मन की परेशानी, दर्द

 © 'शेखर कुमावत'

दूर रहती तो है .........

दूर रहती तो है पर सताती बहुत है ।
भुलाता तो हूँ पर याद आती बहुत है ।।

बात ख्वाबो तक हो तो ठीक थी ।
मगर जहन में आती बहुत है ।।

तस्वीरो से दीवाना बना रखा है ।
गर सामने आये तो क़यामत बहुत है ।।

रुट कर मानती, मान कर रुट जाती ।
इन अदाओ से मुझे आजमाती बहुत है ।।

दिल में बसा कर दुनिया से छिपाती ।
जाने वो इतना प्यार करती बहुत है ।।



© 'शेखर कुमावत'

तेरे आने का...........

तेरे आने का इंतजार करती है निगाहें ।
कुछ ना कहो तो भी कहती है निगाहें ।।
आलम-ए-मंज्जर कुछ ऐसा है दिल का ।
एक मुद्दत से राह पे टिकायें रखी है निगाहें ।।



Tere aane ka intjaar karti he NIGAHEN.
Kuchh na kaho to bhi kahti he NIGAHEN.
Alam-E-Manjjar kuchh aisa he DIL ka.
Ek muddat se rah pe tikayen rakhi he NIGAHEN.


© 'शेखर कुमावत'

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